पत्रिमार्गप्रदीप आदि प्रसिद्ध ग्रंथो के रचयिता श्री महादेव पाठक जी (रतलाम) के सुपुत्र श्री निवास पाठक कृत यह ग्रन्थ लगभग १५० सौ वर्ष पहले संस्कृत में लिखा गया था l
He is a visiting faculty to the following institutes in India: Kaivalyadhama
धन की जानकारी देने वाला बुध आदि प्रश्न I देश से सम्बन्ध रखने वाली संहिता के सम्बन्ध में भी चर्चा है तथा 'गुण सादृश्यम' सिद्धांत को ज्योतिष की एक कुंजी के रूप में प्रस्तुत किया है I आशा है यह पुस्तक ज्योतिष विद्या के प्रचार - प्रसार में उपयोगी सिद्ध होगी I
- षड्वर्ड कुंडलियों के विशिष्ट फलित सूत्र
है तो कितना विस्तृत है
Sarv Dharam Darshan [Hindi] 9789352585755 पत्रिमार्गप्रदीप आदि प्रसिद्ध ग्रंथो के, , l , , , , , , , , , , , l , l l , l l , l l l l